Author(s)

Ms. Swati Mangal, Prof. (Dr.) Reeta Saxena

  • Manuscript ID: 121138
  • Volume 2, Issue 6, Jun 2026
  • Pages: 4291–4297

Subject Area: Sociology

Abstract

वर्तमान समय में किशोरावस्था को मानव जीवन की सबसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण अवस्थाओं में से एक माना जाता है। इस अवधि में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक तथा सामाजिक स्तर पर अनेक परिवर्तन होते हैं, जिनका किशोरों के व्यक्तित्व एवं व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा, अभिभावकीय अपेक्षाएँ, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग तथा सामाजिक परिवेश में हो रहे निरंतर परिवर्तन किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता, आत्मविश्वास में कमी तथा सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। विशेष रूप से राजस्थान के कोटा जिले में, जहाँ बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु अध्ययनरत हैं, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ एक गंभीर विषय के रूप में उभरकर सामने आई हैं। ऐसी परिस्थितियों में योग एक प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य कोटा जिले के किशोरों में योग अभ्यास के मानसिक तनाव, अवसाद एवं सामाजिक अलगाव पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। इस शोध में 13 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 150 किशोरों को शामिल किया गया। अध्ययन हेतु वर्णनात्मक एवं सर्वेक्षण अनुसंधान पद्धति का उपयोग किया गया। आंकड़ों के संग्रहण के लिए मानसिक तनाव मापनी, अवसाद मापनी, सामाजिक अलगाव प्रश्नावली तथा योगाभ्यास संबंधी सूचना प्रपत्र का प्रयोग किया गया। प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत, माध्य, मानक विचलन तथा अन्य उपयुक्त सांख्यिकीय तकनीकों की सहायता से किया गया।
अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि नियमित योगाभ्यास करने वाले किशोरों में मानसिक तनाव, अवसाद एवं सामाजिक अलगाव का स्तर उन किशोरों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया जो योगाभ्यास नहीं करते थे। योगाभ्यास से किशोरों में आत्मविश्वास, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन तथा सामाजिक सहभागिता में सकारात्मक वृद्धि देखी गई। साथ ही, योग ने मानसिक शांति, सकारात्मक सोच एवं बेहतर सामाजिक संबंधों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक एवं सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाला एक समग्र साधन है।
अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने तथा तनाव, अवसाद एवं सामाजिक अलगाव जैसी समस्याओं को कम करने में योग एक प्रभावशाली एवं उपयोगी माध्यम है। इसलिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों तथा सामुदायिक स्तर पर नियमित योग कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि किशोरों के समग्र विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।

Keywords
योगकिशोरावस्थामानसिक तनावअवसादसामाजिक अलगावमानसिक स्वास्थ्यकोटा जिलायोगाभ्यास।