Author(s)

Prof.(Dr.) Sangeeta Mathur, Dileep Kumar

  • Manuscript ID: 121271
  • Volume 2, Issue 7, Jul 2026
  • Pages: 670–675

Subject Area: Other

DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.21470244
Abstract

दक्षिण एशिया एवं व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विगत डेढ़ दशक में शक्ति-संतुलन तेज़ी से पुनर्परिभाषित हुआ है। वर्ष 2020 से 2025 के मध्य गलवान घाटी संघर्ष, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दीर्घकालिक सैन्य गतिरोध, पाकिस्तान की गंभीर आर्थिक अस्थिरता तथा चीन की सतत सैन्य आधुनिकीकरण गति ने भारत, चीन एवं पाकिस्तान की रक्षा नीतियों को नए सिरे से गढ़ा है। प्रस्तुत शोध-प्रपत्र इन तीनों राष्ट्रों की रक्षा नीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह प्रश्न उठाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के मध्य किस प्रकार संतुलन साधा जा रहा है, अथवा साधा जाना चाहिए।
अध्ययन गुणात्मक एवं तुलनात्मक पद्धति पर आधारित है तथा द्वितीयक स्रोतों — सरकारी रक्षा बजट दस्तावेज़ों, रक्षा श्वेत-पत्रों, तथा प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय थिंक-टैंक रिपोर्टों (SIPRI, IISS) — के विश्लेषण पर निर्भर है। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि भारत एक 'संतुलित प्रतिरोध' (balanced deterrence) मॉडल की ओर अग्रसर है जिसमें आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) की भूमिका महत्वपूर्ण है; चीन सैन्य-असैन्य संलयन (civil-military fusion) के माध्यम से रक्षा एवं विकास को संस्थागत रूप से एकीकृत करने का प्रयास कर रहा है; जबकि पाकिस्तान में असंतुलित रक्षा-व्यय, बाह्य ऋण-भार तथा राजनीतिक अस्थिरता आर्थिक सततता के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करते हैं। शोध-प्रपत्र नीति-निर्माताओं हेतु एक संतुलित रक्षा-विकास प्रतिमान की अनुशंसा के साथ समाप्त होता है।

Keywords
रक्षा नीतिराष्ट्रीय सुरक्षासतत विकासभारत-चीन-पाकिस्तानआत्मनिर्भर भारतसामरिक संतुलन